विंशोत्तरी दशा में केतु की पूरी महादशा सात वर्ष की होती है। यह बुध के बाद और शुक्र से पहले आती है। सात वर्ष पद्धति में तय अवधि है; इसका मतलब नहीं कि हर व्यक्ति एक ही उम्र में केतु महादशा शुरू करता है या जन्म पर उसके पूरे सात वर्ष शेष होते हैं।
जन्म पर कितनी अवधि बचती है?
पहली दशा जन्म के चंद्र नक्षत्र से चुनी जाती है। यदि उसका स्वामी केतु हो, तो नक्षत्र का बचा हुआ भाग तय करेगा कि केतु की कितनी अवधि शेष है। पूरी महादशा और जन्म पर शेष महादशा को अलग लिखें।
केवल उदाहरण के लिए, नक्षत्र का आधा भाग शेष हो तो 7 × 1/2 = 3.5 वर्ष बचेंगे। यह अनुपात समझाने का अभ्यास है। किसी व्यक्ति की वास्तविक तारीख निकालने के लिए चंद्रमा का सटीक देशांतर, अयनांश और इस्तेमाल वर्ष-लंबाई चाहिए।
कथा और गणना का अंतर
केतु अवरोही चंद्र नोड है। पौराणिक कथा में केतु सिरविहीन धड़ और राहु सिर से जुड़ा है। इस छवि से ज्योतिष में केतु को वैराग्य या आसक्ति कम होने के विषय से पढ़ा जाता है। कथा दशा की तारीख की गणना नहीं करती और यह जीवन में नुकसान होने का प्रमाण नहीं है।
जन्म कुंडली का संदर्भ
महादशा का नाम जानने के बाद केतु की राशि और भाव देखें। भाव का विषय व्याख्या का संदर्भ देता है। उदाहरण के लिए, सातवें भाव की चर्चा में साझेदारी और दसवें में काम के विषय लिए जा सकते हैं। इससे रिश्ता टूटने या नौकरी छूटने का निष्कर्ष नहीं निकलता।
राहु-केतु के भाव-स्वामित्व को लेकर अलग मान्यताएँ मिलती हैं। किसी रीडिंग में स्वामित्व इस्तेमाल हुआ हो तो उसका नियम पूछें। अलग नियम अपनाकर भी एक ही शब्द इस्तेमाल करने से दो व्याख्याएँ समान लग सकती हैं।
अंतर्दशा अलग स्तर है
महादशा के भीतर अंतर्दशाएँ आती हैं। इसलिए सात वर्षों को एक जैसे अनुभवों का खंड मानना पद्धति के अपने ढाँचे को भी छोड़ देता है। यदि किसी रिपोर्ट में शुरुआत की तारीखें अलग हों तो चंद्र देशांतर, शुरुआती शेष अवधि और कैलेंडर के नियम पहले मिलाएँ।
वैराग्य को रोजमर्रा में कैसे समझें?
किसी पुराने लक्ष्य में रुचि कम हो तो उसके वास्तविक कारण देखें: प्राथमिकता बदली है, थकान है, संसाधन कम हैं या काम अब उपयोगी नहीं रहा? हर बदलाव को केतु की वजह कहना जाँच का रास्ता बंद कर देता है। स्वास्थ्य या संबंध की कठिनाई को आवश्यक आध्यात्मिक हानि मानना भी उचित नहीं।
अगली महादशा: शुक्र
तय क्रम में केतु के बाद शुक्र की महादशा आती है। क्रम का बदलना गणना की बात है; जीवन अचानक अच्छा हो जाएगा, यह अलग दावा है। अपनी दशा-सूची में दोनों की तारीखें देखें और उनसे जुड़े प्रतीकात्मक अर्थों को वास्तविक घटनाओं से अलग रखें।