पंच महापुरुष योगों में पाँच ग्रहों के लिए एक साझा जाँच है: ग्रह अपनी या उच्च राशि में हो और केंद्र में स्थित हो। नीचे के उदाहरण पूर्ण-राशि पद्धति में लग्न से 1, 4, 7 और 10 को केंद्र मानते हैं। कुछ पाठ चंद्रमा से भी गिनते हैं, इसलिए शुरुआत का बिंदु स्पष्ट रखें।
पाँच नाम और राशियाँ
- रुचक, ग्रह: मंगल; अपनी राशियाँ: मेष, वृश्चिक; उच्च राशि: मकर
- भद्र, ग्रह: बुध; अपनी राशियाँ: मिथुन, कन्या; उच्च राशि: कन्या
- हंस, ग्रह: गुरु; अपनी राशियाँ: धनु, मीन; उच्च राशि: कर्क
- मालव्य, ग्रह: शुक्र; अपनी राशियाँ: वृषभ, तुला; उच्च राशि: मीन
- शश, ग्रह: शनि; अपनी राशियाँ: मकर, कुंभ; उच्च राशि: तुला
सूर्य-चंद्र और चंद्र नोड इन पाँच नामित योगों को नहीं बनाते। बुध की कन्या दोनों कॉलम में है; इससे दो अलग भद्र योग नहीं बन जाते।
मिलने और न मिलने के उदाहरण
मेष लग्न में मंगल मकर में रखें। मकर दसवाँ है और मंगल की उच्च राशि है, इसलिए लग्न-आधारित रुचक की दोनों शर्तें मिलती हैं। केवल लग्न वृषभ कर दें तो मकर नौवाँ हो जाएगा; वही ग्रह-राशि लग्न से केंद्र की शर्त नहीं पूरी करेगी।
दूसरी ओर मेष लग्न में कर्क का मंगल चौथे भाव में होगा। वह केंद्र में है, लेकिन अपनी या उच्च राशि में नहीं। केवल भाव की शर्त पर्याप्त नहीं। ये नियम के अभ्यास हैं, किसी वास्तविक व्यक्ति की उपलब्धि के दावे नहीं।
आरंभ-बिंदु से उत्तर बदल सकता है
फलदीपिका अध्याय 6, श्लोक 4 में चंद्रमा से भी इन योगों की चर्चा है। वह विस्तार इस्तेमाल हो तो अलग बताएँ; लग्न से केंद्र न होने को हर पद्धति में अनुपयुक्त न कहें। “इस नियम में चंद्रमा से रुचक” बिना स्पष्टीकरण के हाँ/नहीं से अधिक स्पष्ट है।
पारंपरिक प्रशंसा की सीमा
शास्त्रीय साहित्य इन योगों से अनुकूल वर्णन जोड़ता है। यह ऐतिहासिक व्याख्या है; बुद्धिमत्ता, शरीर, नैतिकता, वैवाहिक सुख या नेतृत्व क्षमता का प्रमाण नहीं। नौकरी या संबंध के योग्य होने का निर्णय कुंडली से न करें।
पारंपरिक पाठक ग्रह की अवस्था और अन्य संबंध भी देख सकते हैं। योग्यताएँ स्पष्ट लिखें। मूल परिभाषा पूरी होने पर भी अलग शाखा फल अलग पढ़ सकती है; व्याख्या बदलना अंकगणित बदलना नहीं।
कार्यपत्रिका और स्रोत
ग्रह, राशि, गिनती का आरंभ, भाव संख्या और दोनों परीक्षाएँ लिखें। एक उदाहरण केवल राशि की शर्त और दूसरा केवल भाव की शर्त में असफल रखें। इससे अनुकूल राशि को पूरा संयोजन समझने की गलती कम होती है।
संदर्भ: फलदीपिका, अध्याय 6, श्लोक 1-4। उदाहरण हमारे हैं। आगे योग बनना और उसका परिणाम तथा राजयोग पढ़ें।