नवांश (D-9) में 30° की हर राशि के 9 हिस्से होते हैं, प्रत्येक 3°20′ का। ग्रह जिस हिस्से में है, उसे तय क्रम से नवांश राशि मिलती है। देशांतर D-1 वाला ही रहता है; नया खगोलीय निरीक्षण नहीं होता।
राशि देने का नियम
चर राशि में उसी राशि से, स्थिर राशि में समावेशी गिनती से नौवीं और द्विस्वभाव राशि में पाँचवीं राशि से आरंभ करें। वृषभ से नौवीं राशि मकर है; इसका अर्थ वृषभ के बाद नौ अतिरिक्त राशियाँ नहीं है।
राशि के भीतर अंश d हो तो खंड संख्या floor(d × 9 ÷ 30) + 1 है; d शून्य या अधिक और 30 से कम होना चाहिए। floor का अर्थ भिन्न भाग हटाना है। शुरुआती राशि को एक गिनें। राशि की गणना और ग्रह के अर्थ की व्याख्या अलग चरण हैं।
गणना का उदाहरण
मेष के 12° पर ग्रह चौथे खंड में है: 10°00′ से 13°20′ के पहले तक। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क गिनने पर D-9 में कर्क मिलता है। वृषभ के 12° पर शुरुआती राशि मकर होगी; चौथा खंड मेष देगा। राशि के भीतर समान अंश होने से वर्ग की राशि समान नहीं होती।
ये गणना सिखाने के लिए चुने अंश हैं, किसी ग्राहक की कुंडली या जीवन के परिणाम नहीं। स्वयं जाँचें: सिंह के 25° पर खंड संख्या floor(25 × 9 ÷ 30) + 1 = 8 है। सिंह स्थिर राशि है, इसलिए आरंभ सिंह से समावेशी गिनती की नौवीं राशि, यानी मेष, से होता है; मेष से आठवीं राशि वृश्चिक है। दूसरी राशि आए तो देखें कि आपने आरंभ राशि को एक की जगह शून्य तो नहीं गिना।
इसका पारंपरिक उपयोग
नवांश का उपयोग ज्योतिष में विवाह, धर्म और ग्रह की गरिमा की चर्चा में होता है। इससे जीवनसाथी का चरित्र, निष्ठा या विवाह का परिणाम स्थापित नहीं होता। वर्गोत्तम का अर्थ D-1 और D-9 में ग्रह की राशि समान होना है; यह दोहराया गणितीय वर्गीकरण है, घटना होने का स्वतंत्र प्रमाण नहीं।
जन्म-समय की अनिश्चितता
वर्ग का लग्न तब बदल सकता है जब मूल लग्न किसी खंड की सीमा पार करे, और D-9 का एक खंड 3°20′ का है। लग्न औसतन लगभग चार मिनट में एक अंश आगे बढ़ता है, इसलिए यह जन्म-समय के मोटे तौर पर तेरह मिनट के बराबर है। असल गति स्थान के अक्षांश और राशि के अनुसार बदलती है, इसलिए इसे अनुमान का पैमाना मानें, सहनसीमा नहीं। जन्म-समय अनुमानित हो तो संभावित सीमा के दोनों सिरों पर गणना करें और देखें कि कौन-सी स्थितियाँ बदलती हैं।
सीमाओं के साथ अभ्यास
एक ग्रह की दोनों राशियाँ और उन्हें देने वाला नियम लिखें। प्रश्न संबंध का हो तो इन प्रविष्टियों को अपेक्षा, सहमति और संवाद जैसे वास्तविक विषयों से अलग रखें। नवांश का नाम उन बातचीतों की जगह नहीं ले सकता।
दो साधनों के परिणाम अलग हों तो व्याख्या की तुलना से पहले जन्म-समय, समय क्षेत्र, अयनांश, अंश की सटीकता और विभाजन का नियम मिलाएँ। दो अयनांशों में एक अंश का अंतर D-9 के एक खंड का लगभग 30% है, जो सीमा के पास बैठे ग्रह को अगली नवांश राशि में पहुँचाने के लिए काफी है। अधिक दशमलव स्थान अनिश्चित जन्म रिकॉर्ड को सही नहीं बना देते।
स्रोत और अगली कड़ियाँ
गणना का संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 6 में सोलह वर्गों वाला भाग। यह पारंपरिक पद्धति का संदर्भ है, व्यक्तिगत भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं। ऊपर के उदाहरण अंकगणित सिखाते हैं। आगे वर्गों का परिचय और वर्ग पढ़ने की पद्धति देखें।