सप्तांश (D-7) के लिए 30° की राशि को 7 बराबर हिस्सों में बाँटते हैं। एक हिस्सा 30° ÷ 7, यानी लगभग 4°17′08.57″ होता है। दशमलव को जल्दी गोल करने से सीमा के पास उत्तर बदल सकता है। गणना D-1 के देशांतर से ही करें।
राशि देने का नियम
विषम राशि में उसी राशि से और सम राशि में समावेशी गिनती की सातवीं राशि से आरंभ करें। खंड की चौड़ाई आवर्ती भिन्न है। हर सीमा को 4°17′ तक गोल करके जोड़ते न जाएँ; मूल अंश की सटीकता बनाए रखें।
राशि के भीतर अंश d हो तो खंड संख्या floor(d × 7 ÷ 30) + 1 है; d शून्य या अधिक और 30 से कम होना चाहिए। floor का अर्थ भिन्न भाग हटाना है। शुरुआती राशि को एक गिनें। राशि की गणना और ग्रह के अर्थ की व्याख्या अलग चरण हैं।
गणना का उदाहरण
मेष के 10° पर floor(10 × 7 ÷ 30) + 1 से तीसरा खंड मिलता है। मेष, वृषभ, मिथुन गिनकर D-7 में मिथुन आएगा। वृषभ के 10° पर उसकी सातवीं राशि वृश्चिक से आरंभ करें; तीसरी मकर होगी। सीमा के पास मूल देशांतर रखें, क्योंकि गोल करने से खंड बदल सकता है।
ये गणना सिखाने के लिए चुने अंश हैं, किसी ग्राहक की कुंडली या जीवन के परिणाम नहीं। स्वयं जाँचें: वृषभ के 20° पर खंड संख्या floor(20 × 7 ÷ 30) + 1 = 5 है। वृषभ सम राशि है, इसलिए आरंभ समावेशी गिनती की सातवीं राशि वृश्चिक से होता है; वृश्चिक से पाँचवीं राशि मीन है। सीमा की जाँच: पहला खंड 30° ÷ 7 = 4°17′08.57″ पर समाप्त होता है, इसलिए 4°17′05″ का ग्रह अभी पहले खंड में है, जबकि 4°17′ तक पूर्णांकित सीमा उसे गलत ढंग से दूसरे खंड में रख देगी।
इसका पारंपरिक उपयोग
सप्तांश परंपरा में संतान और परिवार की निरंतरता से जुड़े पठन में आता है। यह प्रजनन क्षमता नहीं मापता, बच्चों की संख्या या लिंग तय नहीं करता और गर्भावस्था का परिणाम नहीं बताता। ऐसे उपयोग प्रतीकात्मक वर्गीकरण को अप्रमाणित चिकित्सकीय दावे में बदल देते हैं।
जन्म-समय की अनिश्चितता
वर्ग का लग्न तब बदल सकता है जब मूल लग्न किसी खंड की सीमा पार करे, और D-7 का एक खंड लगभग 4°17′ का है। लग्न औसतन लगभग चार मिनट में एक अंश आगे बढ़ता है, इसलिए यह जन्म-समय के मोटे तौर पर सत्रह मिनट के बराबर है। असल गति स्थान के अक्षांश और राशि के अनुसार बदलती है, इसलिए इसे अनुमान का पैमाना मानें, सहनसीमा नहीं। जन्म-समय अनुमानित हो तो संभावित सीमा के दोनों सिरों पर गणना करें और देखें कि कौन-सी स्थितियाँ बदलती हैं।
सीमाओं के साथ अभ्यास
परिवार का पठन शुरू करने से पहले पूछें कि व्यक्ति उस विषय पर चर्चा चाहता भी है या नहीं। D-1 और D-7 की स्थितियाँ लिख सकते हैं, लेकिन कुंडली को “संतानहीन” कहना या रोग का अनुमान लगाना उचित नहीं। वास्तविक निर्णय सहमति, परिस्थिति और उपयुक्त स्वास्थ्य-सेवा पर निर्भर हैं।
दो साधनों के परिणाम अलग हों तो व्याख्या की तुलना से पहले जन्म-समय, समय क्षेत्र, अयनांश, अंश की सटीकता और विभाजन का नियम मिलाएँ। D-7 की सीमाएँ दोहराने वाले भिन्न हैं, इसलिए देखें कि साधन उन्हें पूर्णांकित तो नहीं करता; दो अयनांशों में एक अंश का अंतर एक खंड का लगभग चौथाई है। अधिक दशमलव स्थान अनिश्चित जन्म रिकॉर्ड को सही नहीं बना देते।
स्रोत और अगली कड़ियाँ
गणना का संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 6 में सोलह वर्गों वाला भाग। यह पारंपरिक पद्धति का संदर्भ है, व्यक्तिगत भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं। ऊपर के उदाहरण अंकगणित सिखाते हैं। आगे वर्गों का परिचय और वर्ग पढ़ने की पद्धति देखें।