नवग्रह वैदिक ज्योतिष के नौ "ग्रह" हैं — सात दृश्य पिंड (सूर्य से शनि तक) साथ ही राहु और केतु, वे छाया बिंदु जहां चंद्रमा की कक्षा क्रांतिवृत्त को काटती है। हर रीडिंग इस बात पर निर्भर करती है कि ये नौ बिंदु आपकी राशियों और भावों में कहां स्थित हैं।
Surya
सूर्य कुंडली की आत्मा और अहंकार है — ग्रहों में राजा। इसकी स्थिति मूल पहचान, आत्मविश्वास, अधिकारियों व पिता के साथ संबंध और समाज में प्रतिष्ठा को आकार देती है।
Chandra
चंद्रमा मन, भावनाओं और सहज प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह लगभग हर दिन एक नक्षत्र से गुजरता है, इसलिए इसकी स्थिति — राशि और नक्षत्र दोनों — वैदिक ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Mangala
मंगल ऊर्जा, साहस और दृढ़ता का कारक है। यह शारीरिक शक्ति, भाई-बहन और संपत्ति को नियंत्रित करता है, और यह दर्शाता है कि व्यक्ति संघर्ष को कैसे संभालता है।
Budha
बुध बुद्धि, संचार और वाणिज्य का कारक है। अच्छी स्थिति में बुध विश्लेषणात्मक सोच, वाक्कौशल और अनुकूलनशीलता को तीव्र करता है — और इसके वक्री काल में यही क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
Brihaspati / Guru
गुरु (बृहस्पति) महान शुभ ग्रह है — ज्ञान, विकास और सौभाग्य का प्रतीक। यह गुरुजनों, उच्च ज्ञान, नैतिकता और कुंडली में जो भी यह स्पर्श करता है उसके विस्तार को नियंत्रित करता है।
Shukra
शुक्र प्रेम, सौंदर्य और आनंद का कारक है। यह प्रेम संबंधों, कलात्मक अभिरुचि और आराम व विलासिता के प्रति लगाव को आकार देता है।
Shani
शनि महान गुरु है — अनुशासन, संरचना और कर्म का कारक। इसके पाठ अक्सर धीरे-धीरे आते हैं और धैर्य मांगते हैं, लेकिन यह कुंडली में सबसे टिकाऊ परिणाम बनाता है।
Rahu
राहु उत्तर चंद्र नोड है — एक छाया बिंदु, भौतिक ग्रह नहीं। यह सांसारिक महत्वाकांक्षा, जुनून और अपरंपरागत मार्गों का प्रतिनिधित्व करता है, और जिस भाव व राशि में यह स्थित होता है उसे बढ़ाता है।
Ketu
केतु दक्षिण चंद्र नोड है, जो हमेशा राहु के ठीक विपरीत होता है। यह वैराग्य, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और अतीत से चले आ रहे अधूरे कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
आपकी सूर्य राशि बस शुरुआत है। एक पूर्ण जन्म कुंडली आपके चंद्रमा, उदय राशि और हर ग्रह की स्थिति का खुलासा करती है।
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